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हिमाचल में कचरा और सीवेज प्रबंधन पर NGT सख्त, सरकार को 32 निर्देश

एनजीटी ने ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर हिमाचल सरकार को 32 समयबद्ध निर्देश जारी किए
राज्य में 295 कचरा हॉटस्पॉट और 44.5% सीवेज बिना उपचार के जलस्रोतों में पहुंच रहा है
मुख्य सचिव को विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश, अगली सुनवाई 20 जनवरी 2027 को होगी


राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की प्रधान पीठ ने हिमाचल प्रदेश में ठोस कचरा और सीवेज प्रबंधन की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को 32 विस्तृत एवं समयबद्ध निर्देश जारी किए हैं। अधिकरण ने मुख्य सचिव को निर्देशों के अनुरूप विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी 2027 को होगी।

एनजीटी ने कहा कि राज्य में वैज्ञानिक ठोस कचरा प्रबंधन और सीवेज उपचार व्यवस्था अभी भी पर्याप्त नहीं है। इससे हिमालयी पारिस्थितिकी, नदियों और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन 420.82 टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है। इनमें से 20.48 टन कचरा संग्रहित नहीं हो पाता, जबकि 20.87 टन कचरा अब भी लैंडफिल या अस्थायी डंपिंग स्थलों पर डाला जा रहा है। अधिकरण ने पाया कि कई शहरी निकाय अभी तक वैज्ञानिक कचरा निस्तारण प्रणाली विकसित नहीं कर पाए हैं।

एनजीटी ने यह भी बताया कि प्रदेश में 295 कचरा हॉटस्पॉट मौजूद हैं, जिनमें शिमला नगर निगम क्षेत्र में सबसे अधिक 28 हॉटस्पॉट हैं। इसे घर-घर कचरा संग्रहण और स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण व्यवस्था की कमी का संकेत माना गया है।

सीवेज प्रबंधन को लेकर भी अधिकरण ने गंभीर चिंता जताई। राज्य में प्रतिदिन 159.117 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है, जबकि केवल 88.293 एमएलडी का ही उपचार हो रहा है। यानी करीब 44.5 प्रतिशत सीवेज बिना उपचार के नदियों, नालों और अन्य जलस्रोतों में पहुंच रहा है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 20 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा 30 से अधिक शहरी निकायों में एक भी घर सीवर नेटवर्क से नहीं जुड़ा है, जिससे घरेलू सीवेज सीधे प्राकृतिक जलस्रोतों में बह रहा है।